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Monday, August 10, 2020

Mood love

 कैसे भूलूँ तेरी बातें वो तेरा का संग

तेरे बदन की खुशबू, तेरे चलने का ढंग, 

हवाएं चलने लगती हैं जब चलता हूँ तेरे संग, 

जाती हो जब दूर मुझसे तो हो जाता हूं थोड़ा तंग, 

गाने लगता हैं मेरा मन जब तू नहीं होती मेरे संग, 

कैसे भूलूँ तेरी बातें वो तेरा का संग

होंठ गुलाबी, सुन्दर आँखें और गालों का रंग.

Thursday, June 18, 2020

Chintu


Chintu

ये कहानी उस वक़्त क़ि हैं जब में B. tech में था। या फिर यों कहिए क़ि चिन्टू 8th क्लास में पड़ता था। जैसा क़ि हम सब लोग जानते हैं 13 साल का बच्चा कैसा होता हैं। या यों कहिए कैसा होना चाहिए, मेरे मुताबिक़ 13 साल के बच्चे को चिन्टू होना चाहिए। 



चिन्टू के बचपन को देखकर लगता था उसमे और मुझमे बहुत फर्क हैं। उसके साथ गुजारा हर एक पल याद हैं में उसे अपना छोटा भाई, एक पडोसी, या एक दोस्त या कभी बच्चे क़ि तरह समझता था और समझता हुँ। मैंने उसे हमेशा वास्तविकता ही सिखाई थी और कहता था की जिद्दी बनो और जिद्द ऐसी होनी चाहिए जो वाज़िब हो। जो हो रहा हैं उसपर जल्दी से भरोसा नहीं करना  चाहिए। खैर जाने दो में आपको बताना चाहता हुँ की चिन्टू को बहुत तेज गुस्सा आता था मतलब इतना तेज की वो अपने हाथ दीवार पर मरने लग जाता था। मुझे याद हैं उसके एग्जाम चल रहे थे और साइंस का पेपर अगले दिन होना था। चिन्टू मेरे पास साइंस की बुक लेकर आया करीब दोपहर का समय होगा कुछ चैप्टर अच्छी तरह से पड़े थे, फिर वो हुआ जो नहीं होना चाहिए था वो खाना खाने अपने घर गया और जाते ही चिन्टू की मम्मी ने कहा पुरे दिन इधर से उधर घूमता ही रहेगा या पड़ेगा भी और थोड़े वक्त ही बाद उसके पापा ने कहा पड़ भी ले थोड़ा बहुत साइंस का एग्जाम हैं फेल मत हो जाना। चिन्टू थोड़ी देर बाद फिर से बाहर आया उसके हाथ में किताब भी थी और मैंने भी उसे कह दिया पड़ भी लिया कर भाई थोड़ा बहुत इधर उधर घूमने से कुछ नहीं होगा। इतना कहते ही मानो उसकी आँखों से आग निकल रही हो और सीधा भागता हुआ अपने घर में घुस गया। में उसकी आँखें देखकर समझ गया था की कुछ होने वाला हैं में तुरंत उसके पीछे पीछे आ गया वहा पर देखा उसकी मम्मी कह रही थी पढ़ाई भी  करले बाहर ही घूमता रहेगा। उसका गुस्सा हाई लेवल पर जा चुका था आँखों से आँसू और दीवार पर घूंसे मारने लगा सामान भी तोड़फोड़ दिया फिर उसकी मम्मी मेरे से कहा देखो ये ऐसे करता हैं इसको समझा दिया करो और फिर मैंने चिन्टू को पकड़ लिया फिर मैंने कहा ये कोनसा तरीका हैं में तुझे बहुत समझदार समझता हुँ। तेरी ये हरकत देखकर लगता हैं की में गलत हुँ इतना कहते हुए उसे मैंने गले लग लिया और कहा की गुस्सा थूक दें चिन्टू ने वहीं अपने घर में ही थूक दिया और ये सब देखकर में और चिन्टू का छोटा भाई हसने लगे माहौल थोड़ा हल्का सा हो गया फिर मैंने उसे कहा की अपनों मम्मी को सॉरी बोल कर आ मगर वो मना करता रहा नहीं बोलूंगा बहुत समझाने के बाद उसने सॉरी वोला और आज मुझे  लगता हैं शायद चिन्टू ने पहली बार और आख़री बार सॉरी बोला होगा।उसके बाद मैंने उसकी बुक ली और पहले चैप्टर से लेकर लास्ट तक प्रशन पूछने शुरू करदिये यकीन मानो उसने सारे आंसर ठीक ठाक दें दिए थे।  फिर में उसके घर से अपने घर आ गया। सूरज ढल चुका था और फिर से मेरे पास चिन्टू आगया में कुर्सी पर बैठा था वो मेरे उप्पर ही आकर बैठ गया। और फिर में और चिन्टू जो पुरे दिन हुआ उसे याद करके हॅसने लगे और उसने मुझे चूमलिया। कुछ देर बाद उसके घर से आवाज़ आई। चिन्टू.... चिन्टू... चिन्टू
जिसने भी ये छोटी सी स्टोरी पढ़ी हो उनसे कहना चाहूंगा आपके घर के आस पास भी कोई चिन्टू होगा उसका ध्यान रखें.।
This is dedicated to my loving neighbor chintu


Sunday, January 12, 2020

में तुझे ढूंढ़ता हुँ।

                     में तुझे ढूंढ़ता हुँ। 

               में तुझे ढूंढ़ता हुँ... में तुझे ढूंढ़ता हुँ
कभी सपनो में ढूंढ़ता हुँ तो कभी ख्यालों में ढूंढ़ता हुँ
     तेरा पता कलियों तो कभी बहारों से पूछता हुँ।
           में तुझे ढूंढ़ता हुँ... में तुझे ढूंढ़ता हुँ
         कभी हवा तो कभी नज़ारों  से पूछता हुँ
   तुझे पाने के लिए पागल हुँ ना सोता हुँ ना जगता हुँ।
           में तुझे ढूंढ़ता हुँ... में तुझे ढूंढ़ता हुँ।
       कॉलेज हो या हो घर तेरी यादों में रहता हुँ
         भीड़ हो या तन्हा तेरे बारे में सोचता हुँ।
              में तुझे ढूंढ़ता हुँ... में तुझे ढूंढ़ता हुँ।
   कैसे कहूं,  किससे कहूं,  और कहाँ जाऊं,  तुझे कहाँ पाऊं,
          एक तू ही तो हैं जिसे में पाना चाहता हुँ।
             में तुझे ढूंढ़ता हुँ... में तुझे ढूंढ़ता हुँ
       देखा नहीं कभी भी तुझे फिर पाना चाहता हुँ
       तू मेरी कल्पना ही सही मगर फिर भी तुझे ढूंढ़ता हुँ।
              में तुझे ढूंढ़ता हुँ... में तुझे ढूंढ़ता हुँ

Sunday, December 22, 2019

lynching

चंद लाइने आज के भारत पर जहां लोगो को पीट पीट कर मार दिया जाता है|

हालाँकि कुछ लोग नाराज़ हो जाते है, आज कल लिखने भरसे फिर भी लिख दिया, कभी कोई लिंचिंग की विडियो देखो तो मेरी ये लाइने जरूर याद रखना.


अभी और मारो इसे अभी जान बाकि हैं, देख रही खड़ी खाकी हैं |
हाँ  होंगे बीबी बच्चे इसके तो क्या सरकार का 5 -10 लाख का इनाम बाकि | अभी
बक्त हैं जय श्री राम का थोड़ा बक्त और गुजारो अभी पूरी रामायण बाकि हैं |................PK








#lynching 

Tuesday, November 26, 2019

सफ़र

                                                          सफ़र
में  जा रहा था घर अपने फौजी भाइयों के साथ
थोड़ी आँख क्या लगी मुझे याद आया जब मेरी
एक साल की बची ने पकड़ा था मेरा हाथ 
थोड़ा आगे चला तो  सोचा
मेरी माँ अपनी बहु से मेरे बारे में जरूर  कर रही होंगी कोई ना कोई बात, 
आगे जाते ही मुझे याद आ गए मेरे सारे कमीने यार
जैसे भी थे पर मूझसे करते थे बहुत प्यार.

आधा रास्ता कट ही चुका आँखों  में नमी बेचैनी थी मेरे साथ
बस अब जल्दी हो इन  सबसे मेरी बात, सफर ऐसे कट रहा था
जैसे घड़ी बंद हो गई हो, फिर याद आई मुझे छोटी बहन की वो बात
 जब वो मेरे हाथ पर रखी बांधते हुए कहती थी भैया हमेशा रहना तुम मेरे साथ,
और कैसे भूलूं अपने पापा की ललकार जब गलत करता था तो पडती थी बहुत मार, 
कहते थे लड़ो अपनी मिट्टी के लिए जियो अपनी मिट्टी के लिए | और समझा देते आँखों से हर बात, 
युंही सफर कट रहा था याद करके अपनों की बात..तभी अचानक एक आवाज़ आई जैसे फट गया हो बादल टूट गए हो सारे सपने..... सब खड़े थे लाइन लगाकर घर परिवार और अपने......
सफर ख़तम हुआ घर आया तो तिरंगा लिपटा था मेरे तन पे ......PK




DEDICATED TO  #PULWAMAATTACK  

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